भारत में दवा रिकॉल कैसे होता है? जब कोई दवा गुणवत्ता जांच में फेल हो जाए तो क्या कार्रवाई होती है?
भारत में दवा गुणवत्ता जांच में फेल होने पर क्या कार्रवाई होती है? जानिए NSQ और नकली दवाओं का अंतर, CDSCO की Drug Recall प्रक्रिया और मरीजों की जिम्मेदारी।

क्या आपने कभी किसी दवा के पैकेट पर बैच नंबर देखा है? यह नंबर केवल पहचान के लिए नहीं होता, बल्कि जरूरत पड़ने पर उसी बैच की दवाओं को बाजार से वापस मंगाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कई बार समाचारों में आपने पढ़ा होगा कि CDSCO ने कुछ दवाओं को Not of Standard Quality (NSQ) घोषित किया है या किसी कंपनी को दवा वापस मंगाने का निर्देश दिया है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब कोई दवा गुणवत्ता जांच में फेल हो जाती है, तो उसके बाद क्या होता है?
क्या पूरी कंपनी की दवाओं पर प्रतिबंध लग जाता है? क्या बाजार में मौजूद सभी पैक वापस मंगाए जाते हैं? और अगर किसी मरीज ने ऐसी दवा खरीद ली है, तो उसे क्या करना चाहिए?
आइए, भारत में दवा रिकॉल की पूरी प्रक्रिया को आसान भाषा में समझते हैं।
1. Drug Recall क्या होता है?
Drug Recall का अर्थ है किसी ऐसी दवा को बाजार से वापस मंगाना या उसकी बिक्री रोकना, जिसमें गुणवत्ता, सुरक्षा, प्रभावशीलता या लेबलिंग से जुड़ी कोई गंभीर समस्या पाई गई हो।
यह कार्रवाई मरीजों को संभावित नुकसान से बचाने के लिए की जाती है।
उदाहरण के लिए, किसी कंपनी ने पैरासिटामोल टैबलेट का एक बैच बनाया। सरकारी लैब में जांच के दौरान पता चला कि उसमें निर्धारित मात्रा में सक्रिय दवा मौजूद नहीं है।
ऐसी स्थिति में संबंधित बैच को बाजार से वापस मंगाने और आगे उसकी बिक्री रोकने की कार्रवाई हो सकती है।
महत्वपूर्ण बात: दवा का रिकॉल अक्सर किसी विशेष बैच से जुड़ा होता है। इसका मतलब यह नहीं है कि कंपनी की सभी दवाएँ खराब हैं।
CDSCO की 2024 की Recall and Rapid Alert Guidelines में रिकॉल को गुणवत्ता, सुरक्षा, प्रभावशीलता या लेबलिंग में कमी के कारण बाजार में उपलब्ध उत्पाद को हटाने या उसमें सुधार करने की प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया गया है।
2. NSQ और Spurious Drugs में क्या अंतर है?
दवा की गुणवत्ता से जुड़ी खबरों में दो शब्द अक्सर सुनाई देते हैं—NSQ और Spurious Drugs। दोनों का अर्थ अलग-अलग है।
A. NSQ Drugs – Not of Standard Quality
जब किसी दवा का नमूना निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरता, तो उसे NSQ घोषित किया जा सकता है।
ऐसा कई कारणों से हो सकता है:
दवा में सक्रिय घटक (Active Ingredient) की मात्रा कम या अधिक होना।
Dissolution Test में निर्धारित मानक पूरे न होना।
दवा का वजन या एकरूपता निर्धारित सीमा से बाहर होना।
दवा की पहचान या गुणवत्ता संबंधी जांच में विफलता।
आवश्यक परीक्षणों में निर्धारित मानकों का पालन न होना।
उदाहरण के लिए, यदि किसी टैबलेट में दावा की गई 500 mg दवा के बजाय निर्धारित मानक से कम मात्रा पाई जाती है, तो वह नमूना गुणवत्ता जांच में फेल हो सकता है।
B. Spurious Drugs – नकली दवाएँ
Spurious Drug का मामला अधिक गंभीर होता है। इसका संबंध दवा की गलत पहचान, नकली निर्माता या धोखाधड़ी से हो सकता है।
Drugs and Cosmetics Act, 1940 की धारा 17B के अनुसार, किसी दवा को नकली माना जा सकता है यदि:
वह किसी दूसरी दवा के नाम से बनाई गई हो।
वह किसी अन्य दवा की नकल करके धोखा देने के उद्देश्य से बेची जा रही हो।
उस पर किसी काल्पनिक या अस्तित्वहीन निर्माता का नाम हो।
उसमें किसी दूसरी दवा या पदार्थ को पूरी तरह या आंशिक रूप से मिलाकर वास्तविक उत्पाद के रूप में प्रस्तुत किया गया हो।
वह किसी ऐसे निर्माता की बताई गई हो जिसने वास्तव में उसका निर्माण नहीं किया।
सरल शब्दों में: NSQ का मतलब गुणवत्ता मानक पूरा न करना है, जबकि Spurious का संबंध नकली या धोखाधड़ी से जुड़े उत्पाद से है।
3. दवाओं की गुणवत्ता जांच कौन करता है?
भारत में दवाओं की गुणवत्ता पर निगरानी का काम CDSCO और राज्य औषधि नियंत्रण विभाग मिलकर करते हैं।
Drugs Inspectors बाजार, मेडिकल स्टोर, थोक विक्रेताओं और अन्य सप्लाई चेन स्थानों से दवाओं के नमूने लेकर जांच के लिए सरकारी प्रयोगशालाओं में भेज सकते हैं।
जांच में दवा के अलग-अलग गुणवत्ता मानकों का परीक्षण किया जाता है।
सरकारी स्तर पर प्रमुख संस्थाओं में शामिल हैं:
Central Drugs Standard Control Organisation (CDSCO)
Central Drugs Testing Laboratories
State Drugs Control Departments
State Drugs Testing Laboratories
सरकार ने दवाओं की जांच की प्रक्रिया को डिजिटल बनाने के लिए SUGAM Labs Portal भी शुरू किया है। यह पोर्टल सितंबर 2023 से प्रयोगशालाओं के कामकाज और परीक्षण की स्थिति को एकीकृत करने में मदद कर रहा है।
सरकार ने अप्रैल 2025 में संसद में जानकारी दी थी कि सरकारी प्रयोगशालाओं में NSQ घोषित नमूनों के मामलों में संबंधित निर्माताओं से तत्काल रिकॉल और आगे वितरण रोकने के लिए कहा जाता है।
4. जब कोई दवा टेस्ट में फेल होती है तो आगे क्या होता है?
यह प्रक्रिया केवल लैब रिपोर्ट आने तक सीमित नहीं रहती। रिपोर्ट के बाद संबंधित नियामक प्राधिकरण आगे की कार्रवाई करता है।
Step 1: दवा का सैंपल जांच में फेल होता है
सरकारी लैब दवा के नमूने की जांच करती है। यदि वह निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरता, तो उसे NSQ घोषित किया जा सकता है।
Step 2: निर्माता से जानकारी मांगी जाती है
संबंधित निर्माता से दवा के बैच, निर्माण, परीक्षण और वितरण से जुड़ी जानकारी मांगी जा सकती है।
Step 3: बिक्री रोकने और रिकॉल की कार्रवाई
मामले की प्रकृति और गंभीरता के अनुसार संबंधित बैच की बिक्री रोकने और बाजार से वापस मंगाने का निर्देश दिया जा सकता है।
Step 4: कंपनी की जांच और जवाब
निर्माता को अपनी ओर से स्पष्टीकरण और जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करनी पड़ सकती है। नियामक यह पता लगाने की कोशिश करता है कि गुणवत्ता में कमी किस कारण हुई।
Step 5: आगे की नियामकीय कार्रवाई
जांच के परिणाम के आधार पर कारण बताओ नोटिस, उत्पादन रोकने का आदेश, लाइसेंस निलंबन या रद्द करने जैसी कार्रवाई हो सकती है। गंभीर मामलों में कानून के अनुसार अभियोजन भी किया जा सकता है।
हर NSQ रिपोर्ट का मतलब कंपनी का लाइसेंस रद्द होना नहीं है। कार्रवाई समस्या की प्रकृति, गंभीरता और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करती है।
5. क्या पूरी कंपनी की दवाएँ बाजार से वापस मंगाई जाती हैं?
आमतौर पर रिकॉल का दायरा प्रभावित उत्पाद और बैच की पहचान के आधार पर तय किया जाता है।
मान लीजिए किसी कंपनी ने एक ही दवा के दस अलग-अलग बैच बनाए हैं और गुणवत्ता की समस्या केवल एक बैच में पाई गई है। ऐसी स्थिति में संबंधित बैच पर कार्रवाई हो सकती है।
लेकिन अगर जांच में यह पता चलता है कि समस्या उत्पादन प्रक्रिया, मशीनरी या गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली में व्यापक है, तो नियामक अधिक व्यापक कार्रवाई कर सकता है।
CDSCO की गाइडलाइंस में अलग-अलग प्रकार की गुणवत्ता संबंधी कमियों के अनुसार कार्रवाई का प्रावधान है।
इसलिए एक बैच का रिकॉल पूरी कंपनी के सभी उत्पादों पर प्रतिबंध के समान नहीं होता।
6. Drug Recall में निर्माता, डिस्ट्रीब्यूटर और मेडिकल स्टोर की क्या जिम्मेदारी है?
दवा बाजार में आने के बाद उसकी जिम्मेदारी केवल निर्माता तक सीमित नहीं रहती। पूरी सप्लाई चेन को रिकॉल प्रक्रिया में सहयोग करना होता है।
निर्माता की जिम्मेदारी:
प्रभावित बैच की पहचान करना।
स्टॉक और वितरण का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध कराना।
संबंधित बैच की बिक्री रोकना और रिकॉल करना।
नियामक को आवश्यक जानकारी देना।
गुणवत्ता की समस्या का कारण पता लगाकर सुधारात्मक कदम उठाना।
डिस्ट्रीब्यूटर और स्टॉकिस्ट की जिम्मेदारी:
प्रभावित बैच की बिक्री रोकना।
अपने पास उपलब्ध स्टॉक को अलग रखना।
संबंधित मेडिकल स्टोर और निर्माता को जानकारी देना।
रिकॉल किए गए स्टॉक का रिकॉर्ड रखना।
मेडिकल स्टोर और फार्मासिस्ट की जिम्मेदारी:
CDSCO और राज्य औषधि विभाग के अलर्ट पर नजर रखना।
प्रभावित बैच की बिक्री रोकना।
संबंधित स्टॉक को अलग रखना।
निर्माता या वितरक के रिकॉल निर्देशों का पालन करना।
मरीजों को उचित जानकारी देना।
7. अगर मरीज ने रिकॉल की गई दवा खरीद ली है तो क्या करे?
यह सबसे महत्वपूर्ण सवाल है, क्योंकि आखिरकार दवा की गुणवत्ता का सीधा संबंध मरीज की सुरक्षा से है।
अगर आपको पता चलता है कि आपके पास मौजूद दवा का बैच रिकॉल किया गया है, तो:
दवा का नाम और बैच नंबर जांचें।
CDSCO या संबंधित राज्य औषधि विभाग के आधिकारिक अलर्ट से जानकारी मिलाएँ।
प्रभावित बैच की दवा का उपयोग जारी रखने से पहले डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सलाह लें।
बिना चिकित्सकीय सलाह के किसी जरूरी उपचार को अचानक बंद न करें।
यदि दवा के इस्तेमाल के बाद कोई असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो चिकित्सकीय सहायता लें।
याद रखें: रिकॉल की खबर आने पर घबराने के बजाय दवा के सही बैच की पहचान करना सबसे जरूरी है।
8. भारत में दवा रिकॉल और गुणवत्ता निगरानी कितनी महत्वपूर्ण है?
भारत दुनिया के बड़े दवा उत्पादक देशों में शामिल है। देश में लाखों मरीज रोजाना भारतीय कंपनियों द्वारा निर्मित दवाओं का उपयोग करते हैं।
ऐसे में दवाओं की गुणवत्ता बनाए रखना केवल कंपनियों की व्यावसायिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा विषय है।
सरकार ने दवा गुणवत्ता निगरानी के लिए कई कदम उठाए हैं:
CDSCO द्वारा मासिक NSQ और Spurious Drug Alerts प्रकाशित करना।
SUGAM Labs के माध्यम से प्रयोगशाला प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण।
जोखिम आधारित निरीक्षण और नियामकीय कार्रवाई।
दवा निर्माण के लिए संशोधित Schedule M के तहत Good Manufacturing Practices को मजबूत करना।
दवा की पहचान और ट्रेसबिलिटी को बेहतर बनाने के लिए QR Code और Barcode से जुड़े उपाय।
इन सभी प्रयासों का उद्देश्य है कि खराब गुणवत्ता वाली या नकली दवाओं की पहचान समय पर हो और मरीजों तक उनकी पहुंच रोकी जा सके।
निष्कर्ष: दवा की गुणवत्ता केवल निर्माता नहीं, पूरी सप्लाई चेन की जिम्मेदारी है
दवा का गुणवत्ता परीक्षण में फेल होना एक गंभीर विषय है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है कि उसके बाद कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से कार्रवाई की जाती है।
एक प्रभावी Drug Recall System मरीजों को संभावित नुकसान से बचाने, बाजार से खराब बैच हटाने और दवा उद्योग में जवाबदेही बनाए रखने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
निर्माता, वितरक, मेडिकल स्टोर, फार्मासिस्ट और नियामक संस्थाएँ—सभी की भूमिका इसमें महत्वपूर्ण है।
मरीजों के लिए भी यह जरूरी है कि वे दवा खरीदते समय पैक पर बैच नंबर, एक्सपायरी डेट और निर्माता का विवरण देखें तथा किसी भी रिकॉल संबंधी सूचना को गंभीरता से लें।
आखिरकार, दवा की असली सफलता केवल उसका निर्माण या बिक्री नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता, सुरक्षा और मरीज तक सही स्थिति में पहुंचना है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. NSQ Drug का क्या मतलब है?
NSQ का अर्थ Not of Standard Quality है। ऐसी दवा का नमूना निर्धारित गुणवत्ता मानकों में से एक या अधिक मानकों पर खरा नहीं उतरता।
2. क्या NSQ घोषित होने का मतलब दवा नकली है?
नहीं। NSQ और Spurious अलग-अलग श्रेणियाँ हैं। NSQ का संबंध गुणवत्ता मानकों से है, जबकि Spurious का संबंध नकली या धोखाधड़ी से जुड़े उत्पाद से है।
3. भारत में दवा की गुणवत्ता जांच कौन करता है?
CDSCO और राज्य औषधि नियंत्रण विभाग के Drugs Inspectors नमूने लेकर सरकारी दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं में जांच करवाते हैं।
4. दवा गुणवत्ता जांच में फेल होने पर क्या पूरी कंपनी का लाइसेंस रद्द हो सकता है?
कार्रवाई मामले की गंभीरता और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करती है। इसमें बैच रिकॉल, बिक्री रोकना, उत्पादन रोकना, लाइसेंस निलंबन या रद्द करना और गंभीर मामलों में कानूनी कार्रवाई शामिल हो सकती है।
5. मरीज कैसे पता कर सकता है कि उसकी दवा रिकॉल हुई है या नहीं?
दवा का नाम, निर्माता और बैच नंबर देखकर CDSCO के आधिकारिक Drug Alerts या संबंधित राज्य औषधि विभाग की सूचना जांचें। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सलाह लें।
भारत में दवा रिकॉल, Drug Recall in India, NSQ Drugs, CDSCO Drug Alert, नकली दवाएं, दवा गुणवत्ता जांच, दवा रिकॉल प्रक्रिया।
स्रोत और अधिक जानकारी
CDSCO – Guidelines on Recall and Rapid Alert System for Drugs (2024):
https://www.cdsco.gov.in/opencms/export/sites/CDSCO_WEB/Pdf-documents/biologicals/Guidelinerapid24.pdfCDSCO – Guidelines for Taking Action on Samples Declared NSQ or Spurious:
https://cdsco.gov.in/opencms/resources/UploadCDSCOWeb/2018/UploadAlertsFiles/DCCGuidelinesnsqdrug.pdfCDSCO – Public NSQ and Spurious Drug Alerts:
https://cdscoonline.gov.in/CDSCO/viewPublicNSQDrugPress Information Bureau – Status of Drug Quality Testing under CDSCO:
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2117207Press Information Bureau – Steps Taken to Prevent Sale of Adulterated Drugs:
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2155448
अस्वीकरण: यह लेख केवल शैक्षिक और सूचनात्मक उद्देश्य से है। किसी दवा के रिकॉल या उपयोग से संबंधित निर्णय के लिए CDSCO की आधिकारिक सूचना, संबंधित औषधि नियंत्रण विभाग और योग्य चिकित्सक या फार्मासिस्ट की सलाह को प्राथमिकता दें।








Reader Comments
Comments are reviewed by our desk before they appear. Sign in with your mobile number to join the discussion.